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फरेबी जज्बात ......

Posted On: 30 Nov, 2013 Others,कविता,Others में

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आदरणीय मंच संचालको , आदरणीय मित्रगण एवं प्रिय पाठको … बहुत दिनों बाद आज फिर से आपके सामने एक रचना लेकर आई हूँ ! कुछ व्यक्तिगत कारणों से मंच पर सक्रीय नहीं हो पा रही हूँ इसीलिए आप सबसे क्षमा प्रार्थी हूँ … उम्मीद करती हूँ आपको मेरी ये रचना पसंद आये ! इस मंच से बहुत कुछ सीखा है बहुत कुछ पाया है और यहाँ सदैव रहना चाहूंगी बस आप लोग हौसला देते रहें धन्यवाद !!!

what was my fault

रिश्ता जोड़ा हमने दिल की सांसों से ,

तुम खेलते रहे मेरे मधुर अहसासों से !

तुम करते रहे फरेब पाक ज़ज्बातों से ,

हम डूबते चले गए मन की गहराइयों से !

तुम्हारी तो ये आदत है खेल खेलने की ,

हम टूट कर बिखर गए कांच के आइनों से !

कभी सुबह-शाम की अजान से रहे तुम ,

अब अता होते हो तो मातमी अल्फाजों से !

दिल सजाए बैठा है ख्वाब जाने कितने ,

तुम गुजरते चले गए वक़्त के हाशियों से !

निकल पड़े हो ढूँढने कोई और खिलौना ,

दिल भरा नहीं अभी क्या मेरी बर्बादियों से !

************प्रवीन मलिक****************

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
December 1, 2013

सुन्दर आदरणीया परवीन जी!

sinsera के द्वारा
December 1, 2013

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल.प्रवीण जी….रिश्ता जोड़ा हमने दिल की सांसों से , तुम खेलते रहे मेरे मधुर अहसासों से ! बहुत खूब…

Sonam Saini के द्वारा
December 1, 2013

जे जे पर फिर से आपका स्वागत है मैम ………….Welcome back…………. अच्छी ग़ज़ल लिखी है आपने, उम्मीद है आगे भी ऐसे ही हमे आपकी अच्छी अच्छी रचनाये पढ़ने को मिलती रहेंगी ………….. शुभकामनाये …….

December 1, 2013

खूबसूरत एहसास कराती ग़ज़ल


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