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बेटियाँ मासूम बेटियाँ ......

Posted On: 29 Jul, 2013 Others,कविता में

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मानव सभ्यता की नींव हैं बेटियां
भगवान् की अद्भुत रचना हैं बेटियाँ
खुशनसीब के घर जन्म लेती हैं बेटियाँ
जिंदगी के क़र्ज़ से मुक्त करती हैं बेटियाँ
एक पिता का गुरुर होती हैं बेटियाँ
एक माँ का भी प्रतिरूप हैं बेटियाँ
प्यार और ममता का नाम हैं बेटियाँ
किसी के भी घर की शान हैं बेटियाँ
समाज का एक अहम् अंग हैं बेटियाँ
त्याग और विश्वास का नाम हैं बेटियाँ
हर रिश्ते का आधार हैं बेटियाँ
घर को खुशियों से महका देती हैं बेटियाँ
दुर्गा रूप अवतार भी कहलाती हैं बेटियां
गंगा सी पवित्र व उज्जवल होती हैं बेटियाँ
लक्ष्मीबाई सी साहसी भी होती हैं बेटियाँ
हर रूप में गुणों की खान होती हैं बेटियाँ
दुःख में सहारा तो सुख में बढ़ावा देती हैं बेटियाँ
पर हमारे समाज में आज नहीं सुरक्षित बेटियाँ
भरे बाज़ारों में आज शर्मसार होती हैं बेटियाँ
भेडियों का कभी भी शिकार होती हैं बेटियाँ
दहेज़ प्रथा की भी शिकार होती हैं बेटियाँ
बेटा-बेटी में पक्षपात की भी शिकार होती हैं बेटियाँ
रीती रिवाजों का भी शिकार होती हैं बेटियाँ
जन्म से पहले ही गर्भ में मार दी जाती हैं बेटियाँ
बेटी है तो कल है सर्वज्ञ है फिर भी शिकार हैं बेटियाँ

@@@@@ प्रवीन मलिक @@@@@

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

innerfeeling के द्वारा
August 1, 2013

Hr rishte ka aadhar hai betiya .bahut khoob kha .sunder kvita

    Malik Parveen के द्वारा
    August 2, 2013

    सादर धन्यवाद …

Sushma Gupta के द्वारा
August 1, 2013

बेटियो की मार्मिक दशा का सुन्दर चित्रण करती करती हुई अति सारगर्भित रचना है प्रवीन जी ..साभार ..

    Malik Parveen के द्वारा
    August 2, 2013

    सादर धन्यवाद सुषमा जी …

yogi sarswat के द्वारा
August 1, 2013

बहुत सटीक और सुन्दर रचना आदरणीय प्रवीण मलिक जी ! बधाई

    Malik Parveen के द्वारा
    August 2, 2013

    सादर धन्यवाद योगी जी …

Sumit के द्वारा
August 1, 2013

सुंदर रचना

    Malik Parveen के द्वारा
    August 1, 2013

    धन्यवाद सुमित :)

Bhagwan Babu के द्वारा
July 31, 2013

आग की तरह सच उगलती.. आपकी रचना…. अति सुन्दर…

    Malik Parveen के द्वारा
    August 1, 2013

    भगवान् बाबु फिर भी समाज की कुरीतियाँ इस आग में भस्म नहीं हो पा रहीं हैं पूर्ण रूप से … समय देने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय …

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 31, 2013

दहेज़ प्रथा की भी शिकार होती हैं बेटियाँ…..बेटी है तो कल है सर्वज्ञ है फिर भी शिकार हैं बेटियाँ आदरणीया परवीन जी बहुत सुन्दर ..सच में सौभाग्य और लक्ष्मी ही होती हैं बेटियाँ काश लोगों की आँखों से पर्दा उठे ..लोग मानव बनें ..बिन बेटी ,,नारी कैसा घर ?? आभार भ्रमर ५

    Malik Parveen के द्वारा
    August 1, 2013

    सुरेंदर जी उम्मीद है लोग जल्द से जल्द समझ जाएँ … समय देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय …

sonam saini के द्वारा
July 31, 2013

बहुत अच्छी रचना परवीन मैम …..अपने समाज का सारा सच लिख दिया आपने ….. बहुत अछे ………

    Malik Parveen के द्वारा
    August 1, 2013

    क्या करू सोनम सच लिखने की आदत है बदल नहीं पाती :) शुक्रिया सच पढने के लिए

allrounder के द्वारा
July 31, 2013

नमस्कार परवीन जी …. बेटियों के सभी रूपों का बखान करती बेहतरीन रचना पर हार्दिक बधाई आपको ….

    Malik Parveen के द्वारा
    August 1, 2013

    आपका तहेदिल से शुक्रिया सचिन जी :)

manoranjanthakur के द्वारा
July 31, 2013

अनमोल रत्न बेटी …और लेखनी की धनी आदरणीया प्रवीण जी ..दोनों को .बहुत बधाई

    Malik Parveen के द्वारा
    August 1, 2013

    मनोरंजन जी सादर प्रणाम , रचना को पसंद करने और अपनी अनमोल टिपण्णी करने के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया स्नेह बनाये रखियेगा

sudhajaiswal के द्वारा
July 30, 2013

परवीन जी, सच का आईना, बहुत सुन्दर कविता के लिए बधाई |

    Malik Parveen के द्वारा
    August 1, 2013

    सुधा जी कोई तरोड़ मरोड़ कर नहीं लिखती मैं जो मेरा दिल महसूस करता है वही लिखती हूँ इसीलिए शायद सच भी होता है और दिल को भी छू जाता है ! समय देने के लिए धन्यवाद


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