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कहीं खो गया है वो भारत महान .......

Posted On: 24 May, 2013 Others में

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पीते हैं शराब करते है झगडा

कैसा है ये लोगो का लफड़ा

रोते-बिलखते बच्चे भूख से

फटे-पुराने वस्त्र पहने बीवी

दिखता बदन झाँक-झाँक के

गन्दी नज़रें करें ताक-झाँक

मजबूर औरत तन छुपाती

फटे-पुराने छनकते पल्लू से

करती दिन भर धुप में मजदूरी

दो वक़्त की रोटी जुटाने को

शाम को जब लौटे काम से

पैसे छीन लेता शराबी अकड़ से

नहीं चिंता उसको भूखे बच्चो की

नहीं बीवी के झलकते बदन की

लौटेगा फिर लड़खड़ाते कदमो से

बोलेगा अपशब्द करेगा अपमान

क्या यही है एक मजबूर बीवी की

मैली कुचैली सी दीन-हीन पहचान

और हम फिर लिखते हैं लेखो में

नर और नारी दोनों हैं एक समान

नारी की दुर्दशा आज भी है इस

हिन्दुस्तान की घिनौनी पहचान

लेकिन हम ख़ुशी से गाते हैं

मेरा भारत  दुनिया में महान

जहाँ नन्ही कली से होता दुर्व्यवहार

सजा मिलती नहीं उस कसूरवार को

खुला घूमता रहता है वो दानव

फिर से ढूँढने  नए शिकार को

पैसा फेंको तमाशा देखो यहाँ

मानवता हो रही है नीलाम

ऐसा हो गया है ये हिन्दुस्तान

कैसे गर्व करे हम हो रहे शर्मसार

जाने कहाँ खो गया है वो भारत महान

*******प्रवीन मलिक ********

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 2, 2013

जाने कब मिलेगा वो हिंदुस्तान शायद कभी नही बहुत भाव युक्त रचना सस्नेह बधाई

alkargupta1 के द्वारा
May 27, 2013

“मानवता हो रही है नीलाम ऐसा हो गया है ये हिन्दुस्तान कैसे गर्व करे हम हो रहे शर्मसार जाने कहाँ खो गया है वो भारत महान” एक कटु सत्य …..सार्थक प्रस्तुति परवीन जी

yogi sarswat के द्वारा
May 27, 2013

नारी की दुर्दशा आज भी है इस हिन्दुस्तान की घिनौनी पहचान लेकिन हम ख़ुशी से गाते हैं मेरा भारत दुनिया में महान जहाँ नन्ही कली से होता दुर्व्यवहार सजा मिलती नहीं उस कसूरवार को खुला घूमता रहता है वो दानव फिर से ढूँढने नए शिकार को पैसा फेंको तमाशा देखो यहाँ मानवता हो रही है नीलाम ऐसा हो गया है ये हिन्दुस्तान गुस्से में लिखे हैं आपने ये शब्द ? आदरणीय परवीन जी , लेकिन सटीक लगते हैं , सटीक बैठते हैं

jlsingh के द्वारा
May 25, 2013

भारत अब नहीं रहा महान! ब्यर्थ ही करते रहते गुण गान! जहाँ, रोटी के लिए तन बिकता है, अय्याशी में खेल खलता है जहाँ मुश्किल से मिले पीने का गन्दा पानी वही मस्ती करतीं स्विमिंग पूल में रईसों की जवानी. परवीन जी, आप भारत को खोज रहे हैं यहाँ इंड़िया वाले वस्त्रों को नोच रहे हैं.

omdikshit के द्वारा
May 25, 2013

काबिले-तारीफ़ ,बधाई,परवीन जी.

bhagwanbabu के द्वारा
May 24, 2013

आम हिन्दुस्तानियों की बेवाक कहानी .. सुन्दर .. बधाई ..

Sumit के द्वारा
May 24, 2013

अब ये हिन्दुतान नहीं, इंडिया हो गया है.. हिंदुस्तान तो कही भीड़ में खो गया है :(


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