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दिल की आवाज....

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कह दूँ तुम्हे या चुप रहूँ दिल में मेरे आज क्या है .......

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सवाल हैं बहुत पर जवाब नहीं मिलते ,
कहना है बहुत कुछ पर अल्फाज़ नहीं मिलते …….


कभी लगता है कि सब कुछ है मेरा ,
कभी लगता है कि क्या कुछ भी नहीं मेरा……


कभी- कभी गम में भी मुस्कुराते हैं ,
और कभी खुशियों में भी खुद को
तनहा पाते हैं …..


कभी जिंदगी लगती है बड़ी प्यारी ,
लेकिन कभी- कभी जिंदगी बन जाती है दुश्वारी …..


ख़ुशी के पल, पलक झपकते बीत जाते हैं ,
लेकिन काटे नहीं कटते हैं वो दुखी पल जो बड़ा रुलाते हैं……..


कभी अपने , अपने से नहीं लगते ,
कभी कुछ पराये भी दिल के बड़े करीब होते हैं ………


कहते हैं मौत तो मुफ्त में बदनाम है ,
सारी तकलीफे और दुःख तो जिंदगी ही देती है …………


इस तरह न देखो दोस्तों शक की निगाह से ,
कभी कभी तो दिल इज़ाज़त देता है ये सब बयान करने को …..


कहना है और भी बहुत कुछ ऐ दोस्तों ,
पर आज इतना ही , बाकि फिर कभी मौका मिला तो कहेंगे ……


*****************************************************************प्रवीन मलिक

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55 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mohan के द्वारा
February 9, 2015

निहायत ही घटिया दर्जे की रचना है . सड़क छाप

    Malik Parveen के द्वारा
    August 9, 2016

    शुक्रिया जी … आप ने अपने मन की बात कही . आप जो चाहे लिख सकते हैं !!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 8, 2012

हम भी सुनेंगे जब जब आप कहेंगे

    mparveen के द्वारा
    May 8, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी सादर धन्यवाद…

vaidya surenderpal के द्वारा
April 29, 2012

प्रवीण जी , नमस्कार, कभी अपने , अपने नहीँ लगते । कभी कुछ पराए भी दिल के बड़े करीब होते हैं । यथार्थ को व्यक्त करती कविता …! धन्यवाद ।

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    वैद्या सुरेंदर पाल जी नमस्कार, आपका ब्लॉग पर स्वागत है ! आपने अपना कीमती समय मेरी रचना को दिया और सराहा इसके लिए आपका बहुत बहुत आभार ….. धन्यवाद…

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 29, 2012

परवीन जी अल्फाज तो मुझे भी नहीं मिल रहे तारीफ के लिये. बधाई.

    mparveen के द्वारा
    May 7, 2012

    जय प्रकाश जी नमस्कार, देरी से जवाब के लिए माफ़ी चाहती हूँ ! आपका ब्लॉग पर स्वागत है ! आपका कमेन्ट spam में चला गया था मैंने आज ही देखा …. आपका बहुत बहुत आभार …

Santosh Kumar के द्वारा
April 29, 2012

आदरणीय परवीन जी ,.सादर नमस्ते बहुत दिनों बाद आपकी सुन्दर रचना पढकर बहुत अच्छा लगा ,.,..हार्दिक बधाई

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    संतोष जी नमस्कार , आपको रचना पढ़कर अच्छा लगा ये देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ….. धन्यवाद…

rahulpriyadarshi के द्वारा
April 28, 2012

कहना है बहुत कुछ,मगर अलफ़ाज़ नहीं मिलते… बहुत बेहतरीन रचना,विशेष रूप से छंदों की लयात्मकता प्रभावित करती है.

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    राहुल जी नमस्कार, रचना को समय देने के लिए और अपनी बहुमूल्य प्रतिकिर्या के लिए हार्दिक आभार…. धन्यवाद…

jalaluddinkhan के द्वारा
April 28, 2012

अच्छा प्रयास.आपने अपने एहसास को बेहद खूबसूरती से काग़ज़ पर उतरा है

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    जलालुद्दीन खान जी आपका बहुत बहुत आभार कि आपने मेरी इस रचना को अपना बहुमूल्य समय दिया …. धन्यवाद…

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
April 28, 2012

परवीन जी – अस्सलामोअलैकुम , ज़िन्दगी की बारिकिओं को बहुत ही खुबसूरत तरीके से वयां किया है आपने. मुबारक हो. कभी मेरे ब्लॉग पर भी शिरकत फरमाइयेगा. http://www.hnif.jagranjunction.com

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    हनीफ जी वालेकुम सलाम , बस जो दिल में आया लिख दिया आप लोगो ने अपनी प्रतिकिर्याओं से इसे खूबसूरत बना दिया …. हनीफ जी बिलकुल , बस अभी जा रही हु आपके ब्लॉग पर….. धन्यवाद…

minujha के द्वारा
April 28, 2012

जिंदगी का फलसफा खूबसूरती से समझा पाने की बधाई..प्रवीन जी

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    मीनू जी नमस्कार, मीनू जी जिंदगी को समझना या समझाना ये हमारे बस में कहाँ है ! बस मैंने तो वही लिखा जो कभी कभी महसूस होता है सिर्फ मुझे ही नहीं हर शख्श को ……. धन्यवाद…..

चन्दन राय के द्वारा
April 28, 2012

आदरणीय परवीन मेम, कभी अपने , अपने से नहीं लगते , कभी कुछ पराये भी दिल के बड़े करीब होते हैं …… बहुत ही सुन्दर भाव !

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    चन्दन राय जी नमस्कार, बस कभी-२ असली जिंदगी में ऐसा ही कुछ अहसास होता है सभी को , तो उसी को व्यक्त करने की कोशिश की है आप लोगो की हौसला अफजाई से बहुत अच्छा लग रहा है … धन्यवाद…

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
April 28, 2012

परवीन जी मन का गुबार मन में ना रहे सब कह डालिए ..जय श्री राधे बहुत सुन्दर …. कभी- कभी गम में भी मुस्कुराते हैं , और कभी खुशियों में भी खुद को तनहा पाते हैं ….. कहते हैं मौत तो मुफ्त में बदनाम है , सारी तकलीफे और दुःख तो जिंदगी ही देती है ……… सही है .. भ्रमर ५

    mparveen के द्वारा
    May 7, 2012

    सुरेंदर जी नमस्कार, आपका कमेन्ट भी spam में चला गया था इसीलिए जवाब देने में देरी हो गयी क्षमा करे ….. बस कभी कभी ये सवाल उठते हैं जिनके जवाब nahi milte… समय देने के लिए धन्यवाद…

April 28, 2012

कहते है मौत तो मुफ्त में बदनाम है, साडी तकलीफे व दुःख तो जिंदगी ही देती है……………हार्दिक आभार!

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    अनिल जी नमस्कार, जिंदगी में इतने रंग होते हैं की वो खूबसूरत होती है पर ये भी सच है की उन रंगों में एक रंग काला भी होता है जो कभी कभी इतना गहराता है की आदमी को जिंदगी ही सबसे बड़ी समस्या लगने लग जाती है ……. वैसे सभी रंगों का अपना महत्व होता है ! जिंदगी का हर रंग एक कुछ न कुछ सिखाता है … धन्यवाद…..

vikramjitsingh के द्वारा
April 27, 2012

प्रवीन जी सादर, किसी ने बिल्कुल ठीक कहा है….. ”जिंदगी तो बे-वफ़ा है, एक दिन ठुकराएगी… मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी…” लेकिन ये फिर भी बदनाम है……..

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    विक्रमजीत सिंह जी नमस्कार, जी बिलकुल अब जब जिंदगी है तो मौत भी होगी ! जिंदगी की भी अपनी खूबसूरती है ! आपने रचना को समय दिया हार्दिक आभार ….

jlsingh के द्वारा
April 27, 2012

कहते हैं मौत तो मुफ्त में बदनाम है , सारी तकलीफे और दुःख तो जिंदगी ही देती है ………… बिलकुल सही! काफी दिनों बाद आप पधारी हैं सुन्दर रचना लेकर, बधाई!

    mparveen के द्वारा
    April 29, 2012

    जवाहर जी नमस्कार, जी बस दिल की आवाज है जब निकलती है तब कागज पर उतर जाती है ! आपको रचना सुंदर लगी इसके लिए आपका बहुत बहुत आभार … धन्यवाद ……………

dineshaastik के द्वारा
April 27, 2012

आदरणीया परवीन जी बहुत ही यथार्थ  एवं सटीक  बात  कही है आपने- कभी अपने , अपने से नहीं लगते , कभी कुछ पराये भी दिल के बड़े करीब होते हैं ……… बधाई…….

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    दिनेश जी नमस्कार, ये दुनिया तो एक मेला है फिर भी इस मेले हर कोई अकेला है ….. धन्यवाद….

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 26, 2012

और कभी खुशियों में भी खुद को अकेला (तनहा ) पाते हैं ….. आदरणीय प्रवीन जी कभी कभी थोडा बहुत उर्दू के लफ्जों का भी प्रयोग कर लेना चाहिए आपसे तो ऐसी उम्मीद नहीं थी की आप इस प्रकार का भी लिखेंगी ? बेहतरीन प्रयास पर मुबारकबाद (उम्मीद करता हूँ की मेरे कमेन्ट को समझने के लिए ट्यूशन नहीं रखनी पड़ेगी )

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    राजकमल जी बहुत दिनों बाद आपका स्वागत है …..:) अब सब सही लिखा होता तो आपको ठीक करने का मौका कैसे मिलता ! हमने आपकी बात मानकर अकेले को तनहा में बदल दिया है ….. और अब आदत हो गयी है कहते हैं न “करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान ” अब टयूसन की जरुरत नहीं है …..:) धन्यवाद….

shashibhushan1959 के द्वारा
April 26, 2012

आदरणीय परवीन जी, सादर ! यही कलम की जादूगरी है ! बहुत खूब ! शानदार ! जीवन की विभिन्न स्थितियों की सच्चाई आपने बहुत सरल व सहज तरीके से व्यक्त की है ! यथार्थ और दार्शनिकता का संगम ! हार्दिक धन्यवाद !

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    नमस्कार शशि भूषण जी , कहते हैं जो होता है वो दिखता नहीं और जो दिखता है वो होता नहीं ….. बस उसी प्रकार कई बार जब कोई बहार से बहुत खुश होता है तो उसके मन में हजारो सवाल उठते हैं , कभी भीड़ में खुद को तनहा पाते हैं और कभी तन्हाई में ही मुस्कराते हैं …… दिल से निकले थे भाव बस शब्द दे दिए और आप सब के साथ साँझा कर लिया …. अब आप लोगो ने सराहा दिया तो मनोबल आसमान छूने लगा है … धन्यवाद…

MAHIMA SHREE के द्वारा
April 26, 2012

कभी- कभी गम में भी मुस्कुराते हैं , और कभी खुशियों में भी खुद को अकेला पाते हैं …. आदरणीय प्रवीन जी नमस्कार .. अच्छी और सच्ची अभिवयक्ति … बधाई स्वीकार करें

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    महिमा जी आपका ब्लॉग पर स्वागत है …. जी सच्ची है तभी दिल की आवाज नाम दिया है अपने ब्लॉग को …… आपके आने का और प्रतिकिर्या देने का बहुत बहुत शुक्रिया ….

nishamittal के द्वारा
April 26, 2012

वाह प्रवीन जी,कुछ समय से लेखन के बदले रंग सुखद लगे,सुन्दर रचना बधाई.

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    निशा जी नमस्कार, बस आप लोगो को अछा लग जाता है हमारा लिखा तो लिखना ही सफल हो जाता है …… युहीं आशीर्वाद बनाये रखे …. धन्यवाद….

sinsera के द्वारा
April 26, 2012

प्रिय प्रवीन जी, नमस्कार, बहुत प्यारी बात कही आपने…..ज़रा सोचिये… मिल कर भी क्यूँ आखिर यहाँ, ज़मीं आसमां नहीं मिलते… सवाल बहुत हैं पर जवाब नहीं मिलते…

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    सरिता जी नमस्कार, सोचने का काम आप जैसे बुद्धिजीवी लोगो का है ! कहने को तो:- नदी के दो किनारे साथ रहते हैं , फिर भी हमेशा एक दुसरे से दूर रहते हैं ……………..

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 26, 2012

आदरणीय परवीन जी, सादर प्रणाम आपने तो सब कह ही दिया……………और क्या खूब कहा जो ना कहना था वो भी और जो कहना था वो भी ………..बहोत सुन्दर कविता और भाव सुन्दर कविता के लिए आपको बधाई

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    आनंद जी नमस्कार, बस जब दिल से आवाज निकलती है तो रोका नहीं जा सकता …… आप लोगो ने सराहा मेरे लिए ख़ुशी की बात है … धन्यवाद…

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 26, 2012

बहुत सुन्दर भावनाएँ,प्रवीण जी. कभी अपने , अपने से नहीं लगते , कभी कुछ पराये भी दिल के बड़े करीब होते हैं ……… कहते हैं मौत तो मुफ्त में बदनाम है , सारी तकलीफे और दुःख तो जिंदगी ही देती है ………… बहुत सुन्दर पंक्तियाँ. अर्ज है……. चंद लाइनों में जिन्दगी का फलसफा बयां हुआ जाता है मुट्ठी में कैद कर लिया वक़्त को पर खाली हुआ जाता है

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    राजीव जी नमस्कार, काश ! समय को मुट्ठी में बांधा जा सकता …….. आपको मेरी पोस्ट पसंद आई बहुत बहुत धन्यवाद….

akraktale के द्वारा
April 26, 2012

प्रवीण जी सादर नमस्कार, कहते हैं मौत तो मुफ्त में बदनाम है , सारी तकलीफे और दुःख तो जिंदगी ही देती है ………… बहुत सुन्दरता से अपने जीवन का फलसफा लिख डाला है. बधाई.

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    अशोक जी नमस्कार, जी बस जो दिल में आया वही लिख दिया …….. कहते हैं मौत तो मुफ्त में बदनाम है , सारी तकलीफे और दुःख तो जिंदगी ही देती है ………… ये लाइन मैंने कहीं पढ़ी थी . ये मेरी नहीं हैं बाकि मेरे दिल की आवाज है …. आप लोगों का सहयोग है ….

omdikshit के द्वारा
April 26, 2012

परवीन जी, नमस्कार. कहाँ खो गयी थी आप………अभी कल ही आप की चर्चा ,एक मित्र ब्लागर से हो रही थी,और आज ही…आप ………हम चाहते हैं कि ………आप को मौका मिलता रहे और आप कहती रहें.बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    ॐ जी नमस्कार, ह्म्म्मम्म !! लगता है बुढ़ापे को जीना ही पड़ेगा ……. क्यूंकि आप लोगों ने याद किया और मैं हाजिर हो गयी ! खैर अब मुझे टेंसन हो गयी है कि मुझे किस रूप में याद किया जा रहा था ( अच्छाई या बुराई) क्यूंकि इंसान को इन्ही २ रूपों में याद करते हैं…….. :) जी बहुत बहुत धन्यवाद आप सुनते रहेंगे तो हम भी कहते रहेंगे …..

vinitashukla के द्वारा
April 26, 2012

जिन्दगी का फलसफा बड़ी ख़ूबसूरती से बयां किया है, आपने इस रचना में. अच्छी पोस्ट पर बधाई.

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    धन्यवाद विनीता जी ! बस आप लोगो से ही सीख रही हूँ ……

sonam के द्वारा
April 26, 2012

सादर नमस्कार मैम कभी अपने , अपने से नहीं लगते , कभी कुछ पराये भी दिल के बड़े करीब होते हैं ……… कहते हैं मौत तो मुफ्त में बदनाम है , सारी तकलीफे और दुःख तो जिंदगी ही देती है ………… शायद इसी का नाम तो जिन्दगी है ………………..! बहुत सुंदर रचना …………….!

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    सोनम जी नमस्कार, हम्म्म्म इसी को जिंदगी कहते हैं ! आपके विचार आपकी उम्र के हिसाब से ज्यादा परिपक्व हैं ! ऐसा सिर्फ मैं नहीं सभी कहते हैं की एक छोटी सी लड़की के रूप में यहाँ दादी जी विराजमान हैं ……. :) :) :) बहुत बहुत धन्यवाद आपका छोटी दादी ( बुरा न माने मजाक है !) :)

    sonam के द्वारा
    April 27, 2012

    चलिए अच्छा है , हमारा आशीर्वाद आप सभी के साथ है आप सभी अपनी लाइफ में अपनी मंजिल को जरुर पाएंगे………! हा हा हा …………………………………!

sadhna के द्वारा
April 26, 2012

आपने मेरे दिल की बात कह दी… प्रवीन जी! ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी होता है!

    mparveen के द्वारा
    April 27, 2012

    साधना जी नमस्कार, बस मैं वही कहती हूँ जो आस-पास महसूस करती हूँ ! बस दिल से निकली आवाज को शब्दों का रूप दे देती हूँ ! और ऐसा कुछ सबके साथ होता है ये सच्चाई है …. धन्यवाद….


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