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मैच का फीवर

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asia cup

कल १८-३-२०१२ को सुबह उठे और सबने प्लान बनाया की आज सारे काम जल्दी कर लेंगे क्यूंकि दोपहर में मैच देखना था ! भारत और पाकिस्तान का मैच जो था ! जो की हमेशा की तरह रोमांचंक होता है ! खेर सुबह गए फैक्ट्री में , वैसे तो रविवार था लेकिन होली के कारन पहले काफी छुट्टी हो चुकी थी तो दिशा निर्देश दिए गए की रविवार को काम कराया जाये ! लेकिन ये क्या वहां पर चंद लोग मौजूद थे ! अब कुछ लोगो से पूरी लाइन तो नहीं चल सकती थी इसीलिए सोचा गया की सबको फ़ोन करके बुलाया जाये ! रजिस्टर उठाया सबको बारी बारी फोन किया तो एक ही जवाब मिला की चाहे आज तीन गुना ओवर टाइम में लाइन चलाओ पर हम नहीं आ सकते ! हम होली वाले दिन आ सकते थे लेकिन आज नहीं आज हम सिर्फ मैच देखेंगे ! सबको कहा गया की चार गुना ओवर टाइम देंगे लेकिन सबने जैसे कसम खा रखी हो कोई भी तैयार ना हुआ ! हारकर जो लोग आये थे उनको भी छुट्टी पर भेज दिया की जाओ आप लोग भी मैच देखो !

फिर घर आये तो देखा की कालोनी में लाइट की तारों को कड़ा किया जा रहा था जिसके कारन लाइट को बंद कर दिया गया था ! घर आके देखा बच्चे कार्टून देख रहे हैं ! उनको कहा की बेटा टीवी बंद कर दो दोपहर में मैच देखना है आज लाइट नहीं है अगर आप अभी बंद नहीं करोगे तो फिर मैच नहीं देख पाएंगे ! बच्चे तो जैसे आप सब जानते ही हैं की क्या जवाब दिया होगा — फिर भी मैं बता देती हु की क्या कहा — क्यूँ मैच देखना जरुरी है क्या ? पिछले २ दिन पहले भी तो देखा था ! जीतने के करीब पहुंचकर हार गए ! हमें नहीं देखना मैच ! हम तो टीवी में कार्टून ही देखेंगे ! और अब छुट्टियाँ हैं तो हमारी मर्ज़ी चलेगी की हम क्या देखेंगे बाकि दिनों आप लोग देखते हो ! तब आपकी मर्ज़ी चलती है ! बाप रे बाप इतना गुस्सा एक मैच हार गए तो क्या हुआ बेटा आज भारत और पाक का मैच है ! तो क्या हुआ आज कोण सा अलग से होगा वाही प्लायेर्स खेलेंगे न फिर आज का मैच इतना महत्वपूरण क्यूँ है ? अब उनकी बातो का कोई जवाब ना देते हुए बैठ गए ! समय हो गया मैच शुरू होने का !

मैच शुरू हो गया ! पाक ने टॉस जीत लिया और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला कर लिया ! और फिर लगातार रन बनाते चले गए ! अच्छा खेल रहे थे पाक के बल्लेबाज ! तभी इन्वेर्टर ने सीटी बजानी शुरू कर दी … लो भाई हो गया मैच अब क्या करे अब कैसे देखे मैच ? ..
फिर यकायक ख्याल आया की चलो लैपटॉप पे नेट से देख लेते हैं तभी फटाफट लैपटॉप ऑन किया और नेट जोड़ने का प्रयास किया लेकिन सिग्नल कम होने की वजह से संपर्क नहीं हो पाया और फिर से निराशा के बदल छा गए दिलो दिमाग पर ! . लगता है आज का मैच नसीब में ही नहीं है और मन ही मन कुढ़ते हुए सो गए लाइट का कोई अता पता नहीं था ! ६ बजे अचनक ख्याल आया की स्कोर तो देख ही सकते हैं मोबाइल पे ! और फटाफट मोबाइल पे लोगिन करके स्कोर देखा और देखके …. Total Score: 329/6 (50 Over) . अरे स्कोर तो बड़ा है क्या हम जीत पाएंगे ?? तभी लाइट आ गयी और फिर से विराजमान हो गए टीवी के सामने ! फिर जो देखा तो बस क्या मैच था ! कितना बढ़िया खेले भारतीय खिलाडी ! पाक के भी अच्छा खेले तभी इतना बड़ा स्कोर खड़ा किया ! लेकिन उस स्कोर को पकड़ना और जीतना एक चुनौती से कम ना था ! भारतीय खिलाडियों ने भरपूर कोशिश की और सफल रहे ! विराट तो कल छा ही गए ! और हम मैच जीत गए ! बहुत ख़ुशी हुयी देखकर !


हर मैच जब जीत जाते हैं तो ख़ुशी होती है लेकिन पाक के साथ जीतने की ख़ुशी कुछ अलग ही होती हैं ! ऐसा क्यूँ है ? ये मैच सिर्फ मैच ना रहकर इज्ज़त का सवाल बन जाता है क्यूँ?? भारत और पाक के मैच के लिए लोग काम धंधा छोड़ कर बैठ जाते हैं क्यूँ? ?? भारत और पाक के मैच के दिन गलियां और मार्केट सुनी हो जाती हैं क्यूँ ?? क्या ये मैच हमें भारत पाक की लड़ाई की तरह लगता है ?? की जीतना ही है बस चाहे जो हो जाये …..

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28 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sumit के द्वारा
March 22, 2012

मैच को मैच ही रहने दो, इसे जंग का मैदान मत बनाओ………..इसमें कुछ गलती लोगो की भी है,,,जो सियासी जंग को खेल के मैदान में भी देखना चाहते है ………जिनके लिए पाक हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है और उसे हर जगह हराना है …………….ऐसी सोच बनी हुयी है …………… http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/03/15/आत्महत्या/

    mparveen के द्वारा
    March 22, 2012

    मैदाने जंग में लाखो करोडो लोग मरते हैं , और मैदाने खेल में लाखो करोडो दिल टूटते हैं जब जीती हुयी बाजी दुसरे को सौंप देते हैं सिर्फ और सिर्फ चंद पैसों की खातिर , देश का ईमान बेच देते हैं , लाखो करोडो की भावनाओं को दाव पर लगा देते हैं ! खेल, खेल ना रहकर बिजनेस का हथियार बन जाता है ! खैर सियासत तो आज हर जगह देखने को मिल जाती है फिर चाहे वो खेल का मैदान हो या फिर जंग का मैदान ….

March 21, 2012

आपने एक बड़ा प्रश्न उठाया है. मुझे भी निजी तौर पर ऐसा बहुत बार लगता है, की इसे जंग क्यों बना दिया जाता है? और विश्व-कप के दौरान तो जिस प्रकार फोटो-एडिटिंग के माध्यम से पाकिस्तानी खिलाडियों पर छींटाकशी की गयी, वह भी कोई सभ्यतापूर्ण तरीका नहीं लगता था. खेल तो खेल भावना से ही खेला जाना चाहिए, अन्यथा लड़ाई लड़ने के तो बहुत मौके मिल जाया करते हैं. गहन विचारों की उत्पत्ति इस रचना हेतु मेरी और से बधाई स्वीकारें, सादर.

    mparveen के द्वारा
    March 22, 2012

    टिम्सी जी नमस्कार, आज खेल खेल ना रहकर पैसा कमाने का जरिया बन गया है ! कितना पैसा मिलता है इन लोगो को फिर भी फिक्सिंग वगैरह करते हैं ! ये आजकल जो फोटो एडिटिंग हो रही है वो तो बहुत ही ख़राब है इसके कारण तो बहुत ही मासूमो को कभी कभी काफी नुक्सान हुआ है ! और जब भी खेल के बाद जो बयान बाजी होती है उसको बड़े ही ध्यान से कहना चाहिए खिलाडियों को चाहे वो किसी भी देश के हों ! क्यूंकि इन खिलाडियों के बहुत से युवा फैन होते हैं जो बिलकुल उनकी तरह बनना चाहते हैं उनकी हर बात को अपनाना चाहते हैं तो ऐसे में वो जो भी कहे किसी भी तरह से असंगत नहीं होना चाहिए ……

yogi sarswat के द्वारा
March 21, 2012

आदरणीय परवीन जी सादर नमस्कार ! भारत -पाकिस्तान का मैच लोगों के दिलों में जोश और जूनून पैदा कर ही देता है ! जो कभी मैच नहीं देखता वो भी स्कोर पूछता है ! बढ़िया लेख !

    mparveen के द्वारा
    March 22, 2012

    योगी जी नमस्कार , सब तरफ मैच की ही पड़ी है , इस मैच के कारन कितने काम रुक जाते हैं वो तो देखिये ?? काम काज ठप करके लोग मैच देखते हैं और फिर …………….. :( धन्यवाद…

abodhbaalak के द्वारा
March 21, 2012

परवीन जी पकिस्तान के साथ मैच, मैच न हो कर कुछ और ही हो जाता है, इस लिए अब जब की भारत बिना फाइनल ख्लेले वापस आ रहा है, तब भी कोई खास दुःख ……. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    mparveen के द्वारा
    March 22, 2012

    अबोध जी बिना फ़ाइनल खेले वापस आ रहा है दुःख तो बहुत है पर हम क्या कर सकते हैं ! और सारे कप हम ही जीते जरुरी थोडा है :) .. बाकि देशों को भी एक आध कप ले जाने दो उनको भी तो चाय पीनी है …(अंगूर खट्टे हैं से प्रेरित ) :) …….

March 20, 2012

परवीन जी नमस्कार ! क्रिकेट का फीवर तो चढ़ा जरूर लेकिन आज बांग्लादेश ने श्रीलंका से मैच जीतकर सबका फीवर उतार दिया…..कृपया इस नशे से मुक्ति पायें और बच्चों को कार्टून देखने दें !!!हाहाहाहाहाहा…..अच्छा है !

    mparveen के द्वारा
    March 22, 2012

    डॉ साहब नमस्कार, हांजी सब फीवर उतर गया :( …. अब बच्चे भी आराम से कार्टून देख सकते हैं ! आप लोगो की बात भला कैसे टाल सकते हैं ! धन्यवाद :) …..

minujha के द्वारा
March 20, 2012

प्रवीन जी नमस्कार फिर से स्वागत आपका,क्रिकेट के प्रति कभी मैं भी बहुत लगाव रखा करती थी पर जबसे फिक्सिंग की बात सामने आई ये उत्साह खतम सा हो गया था, विश्वकप ने फिर से वो उत्साह जगाया था पर पिछले दिनों ये जानकर कि भारत पाक का सेमी फाइनल भी फिक्स था सारा जोश जाता रहा,मैं सारी सच्चाई तो नही जानती लेकिन दिल को ऐसी बातों से बङी ठेस लगती है,फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, अपनी जीत पर भला कौन खुश नही होगा ,बधाई सबको

    mparveen के द्वारा
    March 22, 2012

    मीनू जी सही कहा आपने फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी , ये भी एक चस्का है जिसको लग जाता है तो बस लग ही जाता है ! आज खेल खेल न रहकर ये भी बिजनेस बन गए हैं फिर ये सब तो होगा ही क्यूंकि बिजनेस में घटे का सौदा कहाँ होता है ! यही तो मेरा बताने का आशय था की किस तरह लोग मैच के पीछे पागल रहते हैं फिर ये फिक्सिंग वगैरह की बात सुनकर दुःख भी होता है और गुस्सा भी आता है की इन पर इतना पैसा खर्च हो रहा है ये इतना कमा रहे हैं फिर भी इमानदारी से क्यूँ नहीं खेल सकते ! क्रिकेट प्रेमी तो इमानदारी से मैच देखते हैं फिर … समय देने के लिए हार्दिक आभार …

sinsera के द्वारा
March 20, 2012

प्रिय प्रवीण जी नमस्कार, अच्छा तो यही ज़रूरी काम था आपको????? हमें फुसला कर आप ने मैच देखने के लिए छुट्टी मांगी थी…. चलिए ये भी तो एक ज़रूरी काम ही है. हम ने भी किया था . बहुत मज़ा आया. और पाकिस्तान से जीतने का तो कुछ ख़ास ही…आशा है कि इस समय भी आप टी वी के सामने ही जमी होंगी…भारत की एक और जीत की कामना के साथ ….

    mparveen के द्वारा
    March 21, 2012

    सरिता जी नमस्कार, काम तो कुछ और था यानि की एक्साम है २४ को . और आपको तो पता ही है की जब भी एक्साम होता है तो फालतू के सारे काम करते हैं हम क्यूंकि पढने का मन नहीं होता है :) … तो बस ऐसे ही मैच देखके खुश हो लिए और सपने देखने लगे एशिया कप के और फिर सारे सपनो पर पानी फिर गया :( … जमी तो थी टीवी के सामने पर आपने नज़र लगा दी और दुआ कबूल नहीं हुयी (sorry)….

    sinsera के द्वारा
    March 22, 2012

    प्रिय प्रवीण जी, बिलकुल मेरी नज़र ही लगी होगी क्यूँ की मैं ने अपने साहबजादे को भी कहा की एक्साम के लिए पढाई करो, मैच वैच नहीं काम आयेगा..उसका भी कहना है की मैं ने नज़र लगे…. भला हो मेरी नजर का, आप लोग कम से कम पढाई तो करोगे….:-) :)

    mparveen के द्वारा
    March 22, 2012

    जी सरिता जी आप लोगो की बात ना मानकर मरना थोड़ी है ! करनी ही पड़ेगी पढाई नहीं तो ….. :( ..

dineshaastik के द्वारा
March 20, 2012

परवीन जी मैं भी कभी कभी सोचता हूं कि पाकिस्तान से मैच जीतने की अलग ही खुशी ही होती है। क्यों? कभी उत्तर नहीं मिला। शायद मीडिया…या हमारा परिवेश….??????…उत्तर में यही चिन्ह…  http://dineshaastik.jagranjunction.com/author/dineshaastik/

    mparveen के द्वारा
    March 21, 2012

    दिनेश जी कुछ सवालों के जवाब कभी नहीं मिलते जैसे की ” हवा को किसी ने देखा है ?” , ” ईश्वर को किसी ने देखा है ?” , ” हम जीता हुआ मैच कैसे हार गए ?” , ” क्या जानबूझकर हार गए थे ?” …… पर जो लोग दिल से देखते हैं वो तो सिर्फ अपने देश को जीतना देखना चाहते हैं ! एक किस्सा बताती हु मैं आप लोगो को — मेरी fb में मेरे एक फ्रेंड हैं जो की पकिस्तान से हैं ! उन्होंने हमें बहन का दर्ज़ा दिया है ! जब विश्व कप चल रहा था और फ़ाइनल में थे हम तो हमने उनसे पूछा कहिये भाई जान कौन जीतेगा तो उन्होंने कहा की पाकिस्तानी होने के नाते तो में पाकिस्तान की जीत की कामना करूँगा लेकिन अगर भारत जीत भी जाता है तो कोई बात नहीं ये तो हमारा प्रथम घर है ! उनका जवाब सुनकर मुझे मन ही मन आत्म गलानी हुयी की अगर इन्होने पूछा होता तो में कभी नहीं कहती की पाकिस्तान की जीत से मुझे जरा भी ख़ुशी होगी ! खैर सबका अपना एक अलग नजरिया है हर चीज़ को देखने का …

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 19, 2012

स्नेही परवीन जी , सादर . व भाई वाह आनंद आ गया. मैच का जादू छा गया मैच ने निकम्मा कर दिया वैसे ही कब आदमी थे हम काम के. हसरतों के दाग साबुन से धो दिए कपडे प्रेस हो गए बगैर दाम के आज इतना ही. बधाई.

    mparveen के द्वारा
    March 21, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी , ज्यादा आनंद लेने की जरुरत नहीं है हम एशिया कप से बाहर हो चुके हैं अब आराम से अपनी ब्लोगिंग चालू कीजिये ….

akraktale के द्वारा
March 19, 2012

प्रवीण जी सादर नमस्कार, मैच से अधिक बिजली की सप्लाई से जूझते हैं भारतवासी सिर्फ सरकार की गलत नीतियों के कारण. हिन्दुस्तान और पाकिस्तान खेल में चिरप्रतिद्वंदी रहे हैं. कोई भी किसी से कम ना हो की जंग चलती है. दोनों डटकर मुकाबला करते हैं. बस यही बात लोगों का रोमांच बढ़ाती है. आपके आलेख से ज्ञात होता है की कितनी अडचने आयीं किन्तु आपका जज्बा कम नहीं हुआ. बस शायद इसी का परिणाम था की भारत को इतनी बड़ी जीत नसीब हुई. धन्यवाद.

    mparveen के द्वारा
    March 21, 2012

    अशोक जी नमस्कार, सही कहा आपने सरकार की नीतियों के कारन बिजली की सप्लाई से कई बार झुझना पड़ता है लेकिन सिर्फ सरकार को ही हम दोष देते हैं उनका क्या जो तार डालकर बिजली की चोरी करते हैं और फिर पूरी लाइन उड़ जाती है उनके कारन . कोई भी इमानदार नहीं रहा है हर चीज़ में चोरी की आदत पड़ चुकी है . रही बात मैच देखने की तो और सुनिए मेरा आशय सिर्फ मैच को देखने की अपनी सिथ्ती को व्यक्त करना नहीं था बल्कि ये बताना था की कभी कभी किसी भी चीज़ का नशा कितना भारी पड़ सकता है ! जो २ वक़्त की रोटी के लिए तरसते हैं वो सिर्फ और सिर्फ एक मैच के कारन अपनी मजदूरी पर लात मार देते हैं और फिर खबरे आती हैं की मैच तो पहले से ही फिक्स था ! ये फिक्सिंग करके देश की इज्जत के साथ तो खिलवाड़ है ही और खिलवाड़ है उन तमाम लोगो की भावनाओ के साथ जो खिलाडियों को भगवान् की तरह पूजते हैं …

March 19, 2012

सुस्वागतम…..!

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    March 19, 2012

    अपने मन की भावनाओं को बहुत सुन्दरता से व्यक्त किया है,परवीन जी. अपने देश में क्रिकेट की लोकप्रियता अन्य खेलों पर भारी पड़ती है.

    mparveen के द्वारा
    March 21, 2012

    धन्यवाद अनिल जी …

    mparveen के द्वारा
    March 21, 2012

    झा जी नमस्कार , सही कहा आपने की क्रिकेट की बढती लोक प्रियता बाकि खेलो पर भरी पड़ नहीं सकती है बल्कि पड़ चुकी है ! हाकी हमारा राष्ट्रीय खेल है लेकिन शायद आज किसी को याद ही नहीं है बस एक ही धुन स्वर है क्रिकेट क्रिकेट …

sonam के द्वारा
March 19, 2012

Yes mam जीतना ही है चाहे कुछ भी हो जाए और हम जीत चुके है। Welcome back mam.

    mparveen के द्वारा
    March 21, 2012

    thanx sonam ji !!! पर ऐसा क्यूँ है की जीतना ही है ! एक मैच ही तो है और जीत हार तो चलती ही है मैच में फिर क्यूँ हम हार का सामना करने से घबरा जाते हैं ???


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